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मेरे ख़याल मेरे इन किताबों की तरह हैं, कुछ कहे तो कुछ अनकहे, कुछ पढ़े और कुछ अनपढ़े। मेरे अल्फ़ाज़ मेरे उन्हीं अनकहे और अनपढ़े ख़यालों को बयान करने की एक कोशिश है। शायद आपके लिये मेरे इन अल्फ़ाज़ों का कोई मोल ना हो पर मेरे लिये ये अनमोल हैं।
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